Seasons Of India : भारत की ऋतुएं Indian Geography in Hindi

Seasons Of India : भारत की ऋतुएं Indian Geography in Hindi

 Seasons Of India : भारत की ऋतुएं 

भारतीय जलवायु की दो स्‍पष्‍ट ऋतुएं हैं- उत्‍तर-पूर्व मानसून की ऋतु अर्थात शीत ऋतु एवं दक्षिण-पश्‍चिम मानसून की ऋतु अर्थात वर्षा ऋतु।

भारत की ऋतुएं

भारत की परम्‍परागत ऋतुएं-

ऋतु

भारतीय कैलेण्‍डर के अनुसार महीने

अग्रेंजी कैलेण्‍डर के अनुसार महीने

बंसत

चैत्र-बैसाख

मार्च-अप्रैल

ग्रीष्‍म

ज्‍येष्‍ठ-आषाढ़

मई-जून

वर्षा

श्रावण-भाद्र

जुलाई-अगस्‍त

शरद

आश्विन-कार्तिक

सितम्‍बर-अक्‍टूबर

हेमन्‍त

अगहन-पौष

नवम्‍बर-दिؓसम्‍बर

शिशिर

माघ-फाल्‍गुन

जनवरी-फरवरी

 

शीत ऋतु- यह ऋतु जनवरी में शुरू होकर मध्‍य मार्च तक रहती है। सूर्य की किरणें इन दिؓनों मकर वृत पर लंबवत पड़ती हैं। शीत ऋतु में अनेक चक्रवातीय अवदाब भूमध्‍य सागर से पूर्व की ओर चलते हुए उत्‍तर भारत में पहुंचते हैं।

ग्रीष्‍म ऋतु- इस ऋतु में मध्‍य मार्च से मई की अवधि में उत्‍तर भारत में तापमान निरंतर तेजी से बढ़ता है तथा वायुदाब कम हो जाता है। उत्‍तर भारत के अधिकतर भागों में धूल भरी आंधियां और तडि़त झंझाओं का चलना इस ऋतु की सामान्‍य घटना है। इसे ही आम्रवृष्टि (मैंगोशावर) कहते हैं।

- प्रायद्वीप के उत्‍तर-पश्चिमी भाग से शुष्‍क पवनें चलती हैं जिससे दिؓन में गर्म हवाएं प्रवाहित होती हैं, जिन्‍हें लू कहा जाता है।

- असम एवं बंगाल में शाम के समय गरज के साथ होने वाली वर्षा को काल बैशाखी या नार्वेस्‍टर कहा जाता है।

वर्षा ऋतु- इसे दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की ऋतु भी कहा जाता है। भारत में अधिकतर वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के द्वारा होती है। भारतीय मौसम विभाग की परिभाषा के अनुसार वर्षा का दिؓन वह होता है, जब किसी स्‍थान विशेष पर उसकी मात्रस 24 घंटे में 2.5 मिमी से ऊपर हो।

- भारत में वर्षा हिन्‍द महासागर क्षेत्र से उत्‍पन्‍न होने वाली मानसूनी पवनों के द्वारा होती है। उत्‍तर भारत के मैदानी भागों में शीत ऋतु में वर्षा पश्चिमी विक्षोभ या जेट स्‍ट्रीम के कारण होती है।

- तमिलनाडु के तटों पर लौटती हुई मानसून या उत्‍तरी-पूवी मानसून के कारण जाड़े के महीनों (जनवरी-फरवरी) में वर्षा होती है।

- भारत की प्रायद्वीपीय आकृति के कारण दक्षिण-पश्चिम के मानसून दो शाखाओं में विभाजित हो जाते हैं- अरब सागर की शाखा तथा बंगाल की खाड़ी की शाखा।

- दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे पहले भारत के केरल तट में जून के प्रथम सप्‍ताह में आता है। यहां यह पश्चिमी घाटट पर्वत से टकरा कर केरल के तटों पर वर्षा करता है। इसे मानसून विष्‍फोट कहते हैं।

- मेघालय स्थित गारो, खासी एवं जयंतिया पर बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं (दक्षिण-पश्चिम मानसून) के कारण चेरापूंजी एवं मांसिनराम में सर्वाधिक वर्षा होती है।

- विश्‍व में सर्वाधिक वर्षा प्राप्‍त करने वाला स्‍थान मॉसिनराम (लगभग 1141 सेमी) है।

मानसून के अनुसार वर्षा का वितरण-

मानसून

समयावधि

वार्षिक वर्षा का प्रतिशत

दक्षिण-पश्चिम मानसून

जून-सितम्‍बर

73.7

परवर्ती मानसून काल

अक्‍टूबर-दिसम्‍बर

13.3

पूर्व मानसून काल

मार्च-मई

10.0

शीत ऋतु या उ.प. मानसून

जनवरी-फरवरी

2.6

 

- दक्षिण-पश्चिम मानसून द्वारा लाये गए कुल आद्रता का 65 प्रतिशत भाग अरग सागर से एवं 35 प्रतिशत भाग बंगाल की खाड़ी से आता है।

- भारतीय मानसून के आकस्मिक रूप से आरम्‍भ होने के कारण इसे मानसून विस्‍फोट भी कहा जाता है।

- अरब सागरीय मानसून की एक शाखा सिंध नदी के डेल्‍टा क्षेत्र से आगे बढ़कर राजस्‍थान के मरूस्‍थल से होती हुई सीधे हिमाचल पर्वत से जा टकराती है एवं वहां धर्मशाला के निकट अधिक वर्षा कराती है। राजस्‍थान में इसके मार्ग में अवरोध न होने के कारण वर्षा का अभाव पाया जाता है, क्‍योंकि अरावली पर्वतमाला इनके समानान्‍तर पड़ती है।

- तमिलनाडु पश्चिमी घाट के पर्वत वृष्टि छाया क्षेत्र में पड़ता है। अत: यहां दक्षिण-पश्चिम मानसून द्वारा काफी कम वर्षा होती है।

शरद ऋतु- इसको मानसून प्रत्‍यावर्तन काल कहा जाता है। इस ऋतु में बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में उष्‍णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्‍तपत्ति होती है। इन चक्रवातों से पूर्वी तटीय क्षेत्रों में मुख्‍यत: आध्रं प्रदेश एवं ओडिशा तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्र में गुजरात में काफी क्षति पहुंचती है।

- भारत के कुल फसल-क्षेत्र का 4/5 भाग (80 प्रतिशत) सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर रहता है।

- भारत के उत्‍तर-पूर्वी भाग में वर्षा का वार्षिक औषत 300 सेमी से अधिक रहता है। जैसे- असोम, अरूणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल।

वर्षा का वितरण- भारत में वर्षा का वितरण असमान होने के कारण इसे चार वर्गों में विभाजित किया गया है जो निम्‍न है-

साधारण वर्षा वाले क्षेत्र- जिन क्षेत्रों में औसत वार्षिक वर्षा 100 सेमी से 300 सेमी के मध्‍य होती है, जैसे- बिहार, ओडिशा, पंजाब, जम्‍मू कश्‍मीर के क्षेत्र एवं दक्षिण-पूर्वी उत्‍तर प्रदेश का क्षेत्र इत्‍यादि।

- न्‍यून वर्षा वाले क्षेत्र- जिन क्षेत्रों में औसत वार्षिक वर्षा 50 सेमी से 100 सेमी के मध्‍य होती है। जैसे गुजरात, कर्नाटक, पूर्वी राजस्‍थान एवं दक्षिणी पंजाब इत्‍यादि।

- अपर्याप्‍त वर्षा वाले क्षेत्र- जहां 50 सेमी से कम वर्षा होती है, जैसे पश्चिम, राजस्‍थान, कच्‍छ, जम्‍मू-कश्‍मीर का लददाख क्षेत्र आदि।

- मार्च से मई तक की अवधि को पूर्व-मानसून मौसम कहा जाता है। इसमें वार्षिक वर्षा की मात्रा लगभग 10 प्रतिशत प्राप्‍त की जाती है।

- भारत में मानसून की लम्‍बी अवधि के पूर्वानुमान लगाने के लिए एल नीनो धारा का उपयोग किया जाता है।

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