What is black fungus?

What is black fungus?

 क्‍या है ब्‍लैक फंगस?

देश में कोरोना के फैलते संक्रमण के बीच एक नई बीमारी ने दस्‍तक दे दी है। कोरोना संक्रमित व्‍यक्ति में ल्‍यूकोपिनीया होता है और व्‍हाइट सेल कम हो जाते हैं। जिसके कारण से नाक की रक्‍त शिराओं पर यह वायरस अटैक करता है तथा शरीर में दुश्‍वारियां पैदा करने लगता है। अत: हमें नाक को साफ रखना चाहिए और उसे तरल पदार्थ से साफ करना चाहिए। ऐसा करने से हम इसके संक्रमण से बच सकते हैं। मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र समेत कई राज्‍यों में ब्‍लैक फंगस का संक्रमण देखने को मिल रहा है। इस संक्रमण के कारण लोगों के आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा होता है।

क्‍या है ब्‍लैक फंगस?


म्‍यूकोरमाइकोसिस (ब्‍लैक फंगस) क्‍या है?

म्‍युकोरमाइकोसिस अथवा ब्‍लैक फंगस एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है। ये म्‍यूकर फफूंद के कारण होता है, जो आमतौर पर मिटटी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्जियों में पनपता है। म्‍यूकोरमाइकोसिस को काला कवक के नाम से भी पहचाना जाता है। डाक्‍टर कहते हैं किक ये फंगस हर जगह होती है। मिटटी में और हवा में यहां तक कि स्‍वस्‍थ इंसान की नाक और बलगम में भी ये फंगस पायी जाती है। इसमें संक्रमण नाक से शुरू होता है और आंखों से लेकर दिमाग तक फैल जाता है। अर्थात म्‍यूकोरमाइकोसिस (ब्‍लैक फंगस) घातक इंफेक्‍शन होता है। जो कि हमारे शरीर में ब्‍लड सप्‍लाई को प्रभावित करता है। जहां पर यह ब्‍लैक फंगस होजाता है वहां से आगे की ब्‍ल्‍ड सप्‍लाई बाधा उत्‍पन्‍न हो जाती है। डॉक्‍टर के मुताबिक ये फंगस साइनस, दिमाग और फेफड़ों को प्रभावित करती है और डायबिटीज के मरीजों या बेहद कमजोर इम्‍यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों जैसे कैंसर या एचआइवी/एडस के मरीजों में ये जानलेवा भी हो सकती है।

इस संक्रमण के शुरू होने का कारण क्‍या है?

डाक्‍टरों का कहना है कि कोविड-19 के गंभीर मरीजों कको बचाने के लिए स्‍टेरॉइडस के इस्‍तेमाल से ये संक्रमण शुरू हो रहा है। म्‍यूकोमायकोसिस में मृत्‍यु दर 50 प्रतिशत तक होती है। स्‍टेरॉइडस के इस्‍तेमाल से कोविड-19 में फेफड़ों में सूजन को कम किया जाता है और जब शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (इम्‍यून सिस्‍टम) कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अतिसक्रिय हो जाती है तो उस दौरान शरीर को कोई नुकसान होने से रोकने में मदद करते हैं। लेकिन ये इम्‍यूनिटी कम करते हैं और डायबिटीज या बिना डायबिटीज वाले मरीजों में शुगर का स्‍तर बढ़ा देते हैं। माना जा रहा है कि ऐसे में इम्‍यूनिटी कमजोर पड़ने के कारण म्‍यूकोरमायकोसिस संक्रमण हो रहा है। 

इसके अलावा डायबिटीज शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को कमजोर करता है, कोरोना वायरस इसे तेज काम करने के लिए बाध्‍य कर देता है और तब कोविड-19 के इलाज में मदद करने वाले स्‍टेराइडस आग में घी का काम करते हैं। यहां पर म्‍यूकोरमायकोसिस में नाक बंद हो जाना, नाक से खून या काला तरल पदार्थ निकलना, आंखों में सूजन और दर्द, पलको का गिरना, धुधंला दिखना और आखिर में अंधापन होना। मरीज के नाक के आसपास काले धब्‍बे भी हो सकते हैं। डॉक्‍टर्स बताते हैं कि अधिकतर मरीज उनके पास देर से आते हैं, तब तक ये संक्रमण घातक हो चुका होता है और उनकी आंखों की रोशनी भी जा चुकी होती है। 

ऐसे में डॉक्‍टर्स को संक्रमण को दिमाग तक पहुंचने से रोकने के लिए उनकी आंख निकालनी पड़ती है। कुछ मामलों में मरीजों की दोनों आंखों की रोशनी चली जाती है। कुछ दुर्लभ मामलों में डाक्‍टरों को मरीज का जबड़ा भी निकालना पड़ता है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। देखा जाए तो भारत के अलग* अलग राज्‍यों में ये मामलें मिल रहे हैं। दिसम्‍बर और फरवरी के बीच में पांच शहरों मुम्‍बई, बैंगलोर, हैदराबाद, दिल्‍ली और पुणे में ऐसे 58 मामले देखे हैं। अधिकतर मरीजों में कोविड-19 ठीक होने के 12 से 15 दिनों बाद म्‍यूकोरमायकोसिस संक्रमण शुरू हुआ। 

मुबंई के तीन अस्‍पतालों में सिर्फ अप्रैल में म्‍यूकोरमायकोसिस‍ के 40 मरीज आ चुके हैं। इनमें से कई लोगों को डायबीटीज थी और वो घर पर ही रह कर कोविड-19 से ठीक हुए थे। इनमें से 11 मरीजों की जान बचाने के लिए उन्‍हें उनकी एक आंख निकालनी पड़ी। मुम्‍बई में ही सायन अस्‍पताल में पिछले दो महीनों में म्‍यूकोरमायकोसिस के 24 मामले आए हैं जबकि हर साल ऐसे अमूमन छह मामले आते थे। वहीं दक्षिण भारतीय शहर बैंगलूरू में पिछले दो हफतों में म्‍यूकरमायकोसिसस के 19 मामले आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर मरीज नौजवान हैं।

आईसीएएमआर ने म्‍यूकरमायकोसिस की टेस्टिंग और ईलाज के लिए एक एडवाइजरी जारी की है और कहा है कि यदि इसे नजरअंजाद किया तो यह जानलेवा भी हो सकता है। एडवाइजरी में बताया गया है कि ये एक तरह की फंगस या फफूंद है जो उन लोगों पर हमला करता है जो किसी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या के कारण दवाएं ले रहे हैं और इस कारण बीमारी से लड़ने के लिए उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो गयी है। साथ ही आइसीएम आर की एडवायजरी के अनुसार इससे बचने के लिए धूल भरी जगह पर जाने से पहले मास्‍क जरूर लगाएं। जूते, शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहने, मिटटी या खाद का काम करने से पहले हाथों में ग्‍लब्‍स पहनें और घिस कर नहाने जैसे पर्सनल हाइजीन का पालन करें।

बीमारी के लक्षण

* नाक बंद होना

* नाक से खून या काला पदार्थ आना

* नाक के आसपास काले धब्‍बे

* आंखों में सूजन और दर्द

* पलकों का गिरना और धुंधला दिखाई देना

नोट- कोविड मरीजों में ब्‍लैक फंगस नाक, आंख व दिमाग पर सीधा हमला करता है।

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